श्रीनगर। सेना के अधिकारी शहीद उमर फैयाज के मामले में पुलिस को शक है कि उनकी हत्या के पीछे हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों का हाथ है। इतना ही नहीं पुलिस ने ये भी शक जताया है कि युवा अधिकारी की हत्या में पुलिस से छीनी गई आइएनएसएएस राइफल का इस्तेमाल हुआ है।
एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा है कि फैयाज को किसी भी प्रकार की यातना नहीं दी गई है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी। कश्मीर के आईजी एस जे एम गिलानी ने कहा कि शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि फैयाज की हत्या के पीछे हिज्बुल मुजाहिद्दीन का हाथ हो सकता है।
शोपियां में जिस जगह पर फैयाज को गोलियों से भून दिया गया था उस जगह से पुलिस ने आइएनएसएएस राइफल के दो खाली कारतूस भी बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिण कश्मीर में हाल ही में रायफल छीनने वाली दो वारदातें हुईं हैं। इस बात के कुछ सबूत मिले हैं कि कुलगाम में जो घटना हुई थी उसके पीछे लश्कर के आतंकियों का हाथ था वहीं शोपियां कोर्ट परिसर में जो वारदात हुई थी उसके पीछे हिज्बुल के आतंकियों का हाथ था।
गिलानी ने कहा कि अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आनी है लेकिन ये कहा जा सकता है कि फैयाज के शरीर पर यातना के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर और पुलिस की टीम ने उनके शरीर पर ऐसे कोई निशान नहीं पाए।
आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर के हरमेन शोपियां में अपनी मौसी के घर शादी की दावत मेंं गए सेना के एक लेफ्टिनेंट (डाक्टर) को आतंकियों ने अगवा कर शहीद कर दिया। गोलियों से छलनी उसका शव बुधवार की सुबह मिला। पुलिस ने इस वारदात के सिलसिले में एक मामला दर्ज किया और हत्यारे आतंकियों को पकडने के लिए एक तलाशी अभियान चलाया हुआ है।


