Tuesday, January 27, 2026
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एक्शन में योगी सरकार, एक माह में लिए गए ठोस फैसलों की हो रही है तारीफ

लखनऊ। किसी भी नई सरकार के गठन के महज एक माह के भीतर उसके कामकाज का आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन उसकी दिशा जरूर भांपी जा सकती है। बुधवार को योगी आदित्यनाथ की सरकार के एक माह पूरे हो रहे हैं। इस बीच उनकी सरकार ने नियंत्रित और ठोस कदम उठाने पर जोर दिया है।

कोई हड़बड़ाहट नहीं, कोई जल्दबाजी नहीं। उन्होंने अपनी टीम को गतिशील बनाने पर अधिक ध्यान दिया और कार्यसंस्कृति बदलने पर जोर दिया। सरकार के कामकाज के केंद्र में उसका संकल्पपत्र है और इसके लिए जहां बड़े फैसलों से अपने वादों की प्रतिबद्धता का संदेश देने की कोशिश है।

वहीं सौ दिन, छह माह और साल भर के लक्ष्य पहले ही निर्धारित करने की मंशा न सिर्फ अधिकारियों बल्कि मंत्रियों को भी जवाबदेह बनाएगी। सरकार ने इस बीच कई फैसले लिए हैं, लेकिन दो विषयों ने उसे मुख्य रूप से चर्चा में रखा हुआ है।

पहला, अवैध बूचडख़ानों पर बैन और दूसरा तीन तलाक के मामले में अपने संवेदनात्मक पक्ष को मजबूती से सामने रखना। लोगों से मिले फीडबैक की बात करें, तो उनका मानना है कि फिलहाल सरकार सही दिशा में जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को शपथ ग्रहण की शाम को ही अपने मंत्रियों की बैठक में सुशासन और पारदर्शिता के संकल्प को दोहराया, तो साथ ही वादों को समयसीमा में पूरा करने का मंसूबा भी नजर आया। उन्हें अपनी चुनौतियां मालूम हैं, इसलिए चौबीस घंटे में बीस घंटे काम पर जोर है।

एक नई कार्य संस्कृति विकसित हुई। उन्होंने समय और अनुशासन पर जोर दिया। खुद दफ्तर में समय से पहुंचे और दूसरों को भी प्रेरित किया। अगले ही दिन मंत्री अपने-अपने दफ्तरों में साढ़े नौ बजते-बजते नजर आए। जो नहीं आ सके उनका दफ्तर तैयार नहीं था।

अफसरों ने भी रफ्तार पकड़ी, तो फिर हर अगले दिन दफ्तर आने और दफ्तरों में बैठने की उनकी आदत सुधरती गई। कुछ आलसी और गैर-जिम्मेदार बचे, तो योगी के मंत्रियों ने उनकी नकेल कस दी।

कभी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने औचक निरीक्षण कर अनुपस्थित कर्मचारियों का वेतन काटा, तो कभी किसी अफसर को दीवार कूदकर हाजिरी लगानी पड़ी। यह भाव सबके मन में हो गया कि हाजिरी जांच का छापा कभी भी पड़ सकता है।

इसके पहले योगी ने शास्त्री भवन के पांचों तल पर सीढ़ियों से चलकर साफ-सफाई जांची, तो यह एक खास व्यवस्था बन गई। अपने फैसलों की समीक्षा का साहस भी उन्होंने दिखाया। एंटी रोमियो अभियान को लेकर जब पुलिस ने युवाओं का उत्पीड़न शुरू किया, तो उन्होंने इस पर लगाम लगाने में देर न की।

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