Saturday, August 30, 2025
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छोड़कर ‘अमर’ निशां चला गया हैंडसम विलेन

एक दौर था जब विनोद खन्ना को सिनेमा की दुनिया में मोस्ट हैंडसम विलेन कहा जाता था, उसके बाद हीरो की भूमिका में आए, तो 70 के दशक में मोस्ट गुडलुकिंग हीरो का खिताब मिला। इस दौर में वो अमिताभ बच्चन जैसे एंग्री यंगमैन के सबसे बड़े मुकाबलेदार माने गए। फिर स्टारडम की चकाचौंध से मन अचानक ऊबा, तो संन्यास धारण कर लिया। तब उनसे जुड़ी खबरें सेक्सी संन्यासी जैसे खिताब के साथ छपा करती थीं। आज उनका निधन हो गया। हर कोई स्तब्ध है और हर आँख नाम है। 

70 वर्षीय खन्ना कैंसर से पीड़ित थे। हाल ही में उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वे बेहद कमजोर नजर आ रहे थे। विनोद खन्ना ऐक्टिंग के अलावा राजनीति में भी सक्रिय थे। गुरुदासपुर से सांसद खन्ना ने मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में अंतिम सांस ली।

खन्ना को बीते 31 मार्च को मुंबई स्थित सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अस्पताल की ओर से यही कहा गया था कि खन्ना के शरीर में पानी की कमी हो गई है। विनोद खन्ना ने दो शादियां कीं। पहली पत्नी गीतांजलि थीं, जिनसे 1985 में तलाक हो गया। बाद में उन्होंने उन्होंने कविता से शादी की। उनके तीन बेटे अक्षय खन्ना, राहुल खन्ना और साक्षी खन्ना हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका नाम श्रद्धा खन्ना है।

खन्ना ने अभिनय की शुरुआत 1968 में फिल्म ‘मन का मीत’ से की। इसके साथ ही उन्हें ‘मेरे अपने’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘इम्तिहान’, ‘इनकार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘लहू के दो रंग’, ‘कुर्बानी’, ‘दयावान’ और ‘जुर्म’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है। वह आखिरी बार 2015 में शाहरुख खान की फिल्म ‘दिलवाले’ में नजर आए थे।

उनका जन्म 1946 में अविभाजित भारत के पेशावर में हुआ था। विनोद खन्ना अपने वक्त से सबसे हैंसम अभिनेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत नकारात्मक किरदारों से की। बाद में वह मुख्यधारा के हीरो बन गए। उन्होंने सुनील दत्त की 1968 में आई फिल्म ‘मन का मीत’ में विलेन का किरदार निभाया। शुरुआत के दिनों में वह सह अभिनेता या विलेन के रोल में ही नजर आए। ये फिल्में थीं-पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिलो सजन, मस्ताना, मेरा गांव मेरा देश, ऐलान आदि।

1977 में अमिताभ बच्चन के साथ की गई फिल्म ‘परवरिश’ ने उन्हें बड़ा ब्रेक दिलाया। पहली बार इसी फिल्म से उन्होंने स्टारडम का स्वाद चखा। विनोद को 1971 में पहली सोलो लीड फिल्म ‘हम तुम और वो’ मिली। बाद में गुलजार के ‘मेरे अपने’ में शत्रुघ्न सिन्हा के अपोजिट निभाए गए उनके किरदार को आज भी लोग याद करते हैं। गुलजार की ही फिल्म ‘अचानक’ में मौत की सजा पाए आर्मी अफसर का किरदार निभाने के लिए भी उन्हें काफी तारीफ मिली। बाद में अमिताभ के अपोजिट हेराफेरी, खून पसीना, अमर अकबर एंथनी, मुकद्दर का सिकंदर में भी उन्होंने यादगार रोल निभाया।

कहा जाता है कि अगर विनोद खन्ना ओशो के आश्रम न जाते तो आने वाले वक्त में वह अमिताभ बच्चन के स्टारडम को फीका कर देते। बहुत कम लोग ही जानते हैं कि विनोद खन्ना की सबसे हिट फिल्मों में से एक ‘कुर्बानी’ का रोल पहले अमिताभ बच्चन को ही ऑफर किया गया था। उन्होंने यह रोल ठुकरा दिया, जिसके बाद विनोद खन्ना ने यह किरदार निभाया। बाद में विनोद को ‘रॉकी’ फिल्म ऑफर की गई, लेकिन उन्होंने यह फिल्म नहीं की। इस फिल्म से संजय दत्त ने बॉलिवुड में एंट्री ली।

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