बहुजन समाज पार्टी से बर्खास्तगी के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नसीमुद्दीन ने कहा कि मायावती ने चुनाव के बाद मुझे बुला कर कहा कि मुसलमान गद्दार हैं। ये कहने पर मैंने आपत्ति की कि ऐसा मत कहें। मैंने कहा कि मैं किसी मौलाना को लेकर आपके पास नहीं आया। इसके बाद मायावती ने कहा कि विधानसभा चुनावों में अपर कास्ट, पिछड़े वर्ग के मतदाताओं ने भी बसपा को वोट नहीं दिया. इसके साथ दलितों में धोबी, सोनकर, पासी और कोरी ने भी बसपा को वोट नहीं दिया।
लंबे समय तक मायावती के विश्वास पात्र रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मैंने उनसे कहा कि जब तक गठबंधन नहीं हुआ था। मुसलमान हमारे साथ था, लेकिन गठबंधन होने के बाद मुसलमान कन्फ्यूज हो गया और वोट बंट गया। ऐसा नहीं है कि हमें मुसलमानों को वोट नहीं मिला, लेकिन हां समर्थन कम मिला है।
उन्होंने कहा कि मेरी बात से असहमति जताते हुए बसपा सुप्रीमो ने मुझे गाली दी और कहा कि मैं उन्हें मूर्ख बना रहा हूं। मायावती ने कहा कि मुसलमान धोखेबाज हैं। दाढ़ी वालों ने कभी बसपा का साथ नहीं दिया। नसीमुद्दीन ने कहा कि मायावती ने सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं बल्कि धोबी, पासी, कोहार सभी को बुरा भला कहा।
अपने ऊपर लगे आरोपों पर नसीमुद्दीन ने कहा कि मेरे और बेटे के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और तथ्यों को छुपाया गया है। सिद्दीकी ने मायावती पर पैसे मांगने के भी आरोप लगाए और कहा कि बसपा सुप्रीमो ने मुझसे 50 करोड़ रुपये मांगे, कहा कि जैसे भी हो पैसा लाओ, तभी पार्टी में आगे बढ़ पाओगे। भले ही तुम्हें इसके लिए अपनी संपत्ति ही क्यों न बेचनी पड़े।


