• सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए छह दिन तय किए.
• तीन दिन उनके लिए जो ट्रिपल तलाक को चुनौती दे रहे हैं और तीन दिन उनके लिए जो इसका बचाव कर रहे हैं.
• सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों को बेंच द्वारा तय किए गए दो सवालों पर जिरह करने के लिए दो-दो दिन मिलेंगे.
• इसके अलावा, प्रतिवाद करने के लिए भी एक दिन मिलेगा.
• अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि दलीलों को दोहराए जाने पर वह वकीलों को रोक देगा.
• कोर्ट ने कहा, ‘हर पक्ष जो भी दलील देना चाहे, दे सकता है लेकिन किसी तरह का दोहराव नहीं होना चाहिए. वकीलों को ट्रिपल तलाक की वैधता के विषय पर फोकस करना होगा.’
सुप्रीम कोर्ट में हर रोज सुनवाई:
• देश के सबसे जटिल सामाजिक मुद्दों में से एक तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में सुनवाई शुरू हो गई है.
• कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए रोज सुनवाई करने का फैसला किया है.
• काफी संवेदनशील मुद्दे पर दाखिल की गई इस याचिका को समानता की खोज बनाम जमात उलेमा-ए-हिंद नाम दिया गया है.
संविधान पीठ में 5 अलग-अलग धर्मों के हैं जज:
• मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर (सिख )
• जस्टिस कुरियन जोसेफ (ईसाई )
• जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन (पारसी)
• जस्टिस उदय उमेश ललित (हिंदू)
• जस्टिस एस. अब्दुल नजीर (मुस्लिम)
• बेंच को असिस्ट करने के लिए एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी सुनवाई के दौरान मौजूद रहेंगे.
क्या हैं ट्रिपल तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला?
• ट्रिपल तलाक यानी पति तीन बार ‘तलाक’ लफ्ज बोलकर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है.
• बहुविवाह यानी एक से ज्यादा पत्नियां रखना.
• निकाह हलाला यानी पहले शौहर के पास लौटने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रक्रिया.
बहु विवाद पर चर्चा नहीं:
• कोर्ट ने कहा है कि वह तीन तलाक और निकाह हलाला पर सुनवाई करेगा, लेकिन बहु विवाह पर नहीं.
सरकार ने विचार के लिए दिये हैं ये सवाल
• क्या एक बार मे तहत तलाक-ए-बिद्दत (एक बार में 3 तलाक कहना) , निकाह हलाला और बहुविवाह को संविधान के अनुच्छेद 25(1) (धार्मिक स्वतंत्रता) के तहत संरक्षण प्राप्त है.
• क्या अनुच्छेद 25 संविधान में प्राप्त मौलिक अधिकारों के अधीन है। विशेष तौर पर अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार) के.
• क्या पर्सनल ला को अनुच्छेद 13 के तहत कानून माना जाएगा?
• क्या तलाक-ए-बिद्दत, निकाह हलाला और बहुविवाह उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है, जिन पर भारत ने भी दस्तखत किए हैं?
तीन बिंदुओं पर ही होगी चर्चा:
• ट्रिपल तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा है या नहीं?
• क्या तीन तलाक को पवित्र माना जा सकता है?
• क्या तीन तलाक मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है?
सात याचिकाओं पर सुनवाई
• कुल सात याचिकाएं सुनवाई के लिए लगी हैं.
• याचिकाएं केंद्र सरकार, पांच पीड़ित महिलाएं और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से है.
• पांच पीड़िता हैं- शायरा बानो, आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया सबरी.
कैसे हुई मामले की शुरुआत
• फरवरी 2016 में उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली शायरा बानो (38) वो पहली महिला बनीं जिन्होंने ट्रिपल तलाक, बहुविवाह (polygamy) और निकाह हलाला पर बैन लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की। शायरा को भी उनके पति ने तीन तलाक दिया था. अर्जी में कहा गया है कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 व 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.
• इसके बाद, एक के बाद एक कई अन्य याचिकाएं दायर की गईं.
• एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने भी खुद संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कि वह स्पेशल बेंच का गठन करें, ताकि भेदभाव की शिकार मुस्लिम महिलाओं के मामलों को देखा जा सके.
• शुरूआत मे ही कोर्ट ने साफ कर दिया था कि वो संवैधानिक दायरे में कानूनी मुद्दे पर विचार करेगा. किसी की व्यक्तिगत याचिकाओं पर विचार नहीं होगा.
• सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल और नैशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी को जवाब दाखिल करने को कहा था.
• कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षकारों को लिखित दलीलें दाखिल करने के छूट देते हुए मामले पर गर्मियों की छुट्टी में 11 मई से नियमित सुनवाई की तिथि तय की थी.
• केंद्र सरकार, पिटीशन लगाने वाली महिलाएं और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित सभी पक्ष कोर्ट में लिखित दलीलें पेश कर चुके हैं.
विभिन्न पक्षों की राय
तीन तलाक पर केंद्र सरकार की राय
• इस मुद्दे को मुस्लिम महिलाओं के ह्यूमन राइट्स से जुड़ा मुद्दा बताता है। ट्रिपल तलाक का सख्त विरोध करता है.
• केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि ट्रिपल तलाक के प्रावधान को संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार और भेदभाव के खिलाफ अधिकार की रोशनी में देखा जाना चाहिए.
• केंद्र ने कहा है कि लैंगिक समानता और महिलाओं के मान-सम्मान के साथ समझौता नहीं हो सकता.
• भारत जैसे सेक्युलर देश में महिलाओं को संविधान में जो अधिकार दिए गए हैं, उससे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता.
• मूल अधिकार के तहत संविधान के अनुच्छेद-14 में लैंगिक समानता की बात है.
• महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और भावनात्मक तरीके से हशिए पर रखना संविधान के अनुच्छेद-15 के तहत गलत होगा.
• केंद्र का मानना है कि ट्रिपल तलाक और बहुविवाह धार्मिक स्वतंत्रता के तहत संरक्षित नहीं हैं.
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने किया है विरोध
• मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने कोर्ट में दाखिल लिखित जवाब में सुनवाई का विरोध किया है.
• ये पर्सनल ला से जुड़ा मुद्दा है और कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं कर सकता.
• पर्सनल ला कुरान और हदीस की रोशनी में बना है और सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल ला को दोबारा नहीं लिखा जा सकता.
• पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक, मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती नहीं दी जा सकती. पर्सनल लॉ को संविधान के अनुच्छेद-25, 26 और 29 के तहत संरक्षण मिला हुआ है.
जमीयत-ए-इस्लामी हिंद:
• ये भी मजहबी मामलों में सरकार और कोर्ट की दखलंदाजी का विरोध करता है. यानी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ा है.
मुस्लिम स्कॉलर्स
• इनका कहना है कि कुरान में एक बार में तीन तलाक कहने का जिक्र नहीं है.
उदारवादी मुस्लिम भी खिलाफ
-वरिष्ठ मौलाना सैयद शहराबुद्दीन सलाफी फिरदौसी ने तीन तलाक और हलाला को गैरइस्लामी बताते हुए इसे महिलाओं पर अत्याचार का हथियार बताया है. इंडियन मुस्लिम्स फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी (IMSD) ने मौलाना फिरदौसी के बयान का स्वागत किया है.
-ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएसपीएलबी) तीन तलाक के मामले में कड़े कानून की पैरवी कर रहा है. एआईएसपीएलबी के प्रवक्ता मौलाना यासबू अब्बास ने कहा कि शिया समुदाय में एक बार में तीन तलाक के लिए कोई जगह नहीं है.
-बोहरा विद्वान इरफान इंजीनियर का कहना है कि तीन तलाक गैर इस्लामी है, लेकिन केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए.
-शिया समुदाय के नेता सलीम रिजवी ने कहा है, ‘हम तीन तलाक में यकीन नहीं करते और शिया समुदाय में इस पर अमल नहीं होता।’ वहीं, वरिष्ठ पत्रकार असद रजा का कहना है कि यह मुद्दा पुरूषवादी वर्चस्व से जुड़ा है और इसका कुरान में कोई जिक्र नहीं है.
नागरिक अधिकारों के बारे में संविधान
• अनुच्छेद 13 के अनुसार – मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है तथा इनका उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून को न्यायालय शून्य घोषित कर सकता है.
• अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता- इसका अर्थ यह है कि राज्य सही व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा उन पर एक समान ढंग से उन्हें लागू करेगा.
• अनुच्छेद 15: धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेद-भाव का निषेद- राज्य के द्वारा धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग एवं जन्म-स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा.
• बालकों और स्त्रियों की स्वाभाविक प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर उनके संरक्षण के लिये उपबन्ध बनाने का अधिकार अनुच्छेद 15(3) के तहत राज्य को प्राप्त है.
• अनुच्छेद 21 के अनुसारः- किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और शरीर की स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
• अनुच्छेद 25: अंत:करण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता: कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है. लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था व समाज कल्याण एवं सुधार आदि के अंतर्गत इस पर रोक लगाई जा सकती है.
• अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता: व्यक्ति को अपने धर्म के लिए संथाओं की स्थापना व पोषण करने, विधि-सम्मत सम्पत्ति के अर्जन, स्वामित्व व प्रशासन का अधिकार है.
• अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक हितों का संरक्षण कोई अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा, जाति, धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?
• इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 मई को ही एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था- संविधान से ऊपर कोई पर्सनल लॉ नहीं है. तीन तलाक संविधान के खिलाफ है. संविधान के दायरे में ही पर्सनल लॉ लागू हो सकता है.
नरेंद्र मोदी ने ट्रिपल तलाक पर क्या कहा?
May 9, 2017:
• मोदी ने 9 मई को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बैनर तले मिलने आए 25 मुस्लिम नेताओं से कहा था- ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर सियासत ना होने दें. इस मुद्दे पर सुधार की शुरुआत करें.
Apr 29, 2017:
• ‘समाज के अंदर के लोग ही परंपराओं को तोड़ आधुनिक व्यवस्थाओं को अपनाते हैं। मुझे उम्मीद है कि मुस्लिम समाज से ही लोग आगे आएंगे और तीन तलाक के संकट से जूझ रही मुस्लिम महिलाओं के लिए रास्ता निकालेंगे.’
• ‘तीन तलाक को लेकर आज इतनी बहस चल रही है। मैं भारत की महान परंपरा को देखते हुए… मेरे भीतर एक आशा का संचार हो रहा है। मेरे मन में एक आशा जगती है कि इस देश में समाज के भीतर से ही लोग निकलते हैं, जो बुरी परंपराओं को तोड़ते हैं और आधुनिक परंपराओं को विकसित करते हैं.’
• ‘सदियों पहले से ही भारत में महिलाओं को अपनी बात कहने का हक दिया गया था. तीन तलाक के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं हो.’
• ‘समस्या का समाधान करना जरूरी है। तीन तलाक के संकट से गुजर रही मुस्लिम महिलाओं को इससे छुटकारा दिलाना है। …भारत के प्रबुद्ध मुसलमान न केवल देश में बल्कि दुनिया को तीन तलाक से निपटने का रास्ता दिखाएंगे.’
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पावरफुल क्यों?
• न्यूज एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 85% सुन्नी मुसलमान हैं. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इनकी नुमाइंदगी का दावा करता है.’ इसके अलावा 15% से 17% शिया हैं. पांच लाख के करीब बोहरा मुसलमान हैं.
ट्रिपल तलाक पर AIMPLB के 8 निर्देश:
• पति और पत्नी में अनबन हो जाए तो पहले वो खुद इसे खत्म करने की कोशिश करें.
• इस तरह से बात न बने तो अस्थायी तौर पर रिश्ता खत्म किया जा सकता है.
• ये तरीके नाकाम होने पर दोनों तरफ के लोग समझौते की कोशिश करें या दोनों तरफ से किसी एक शख्स को तय कर समझौते और फैसले की कोशिश हो.
• इनसे मामला न सुलझे तो पति एक तलाक देकर पत्नी को छोड़ दे. इद्दत का वक्त गुजरने दे। इद्दत के दौरान अगर समझौता हो जाए, तो पति-पत्नी पहले की तरह शादीशुदा जीवन बिताएं. इद्दत तक समझौता नहीं होता है तो रिश्ता खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा. औरत प्रेग्नेंट है तो इद्दत का वक्त प्रेग्नेंसी खत्म होने तक जारी रहेगा. तलाक देने की सूरत में पति को महर और इद्दत का खर्च देना होगा. महर बाकी हो तो वो फौरन अदा करनी होगी. इद्दत के दौरान तलाक के बाद 3 महीने 13 दिन तक औरत घर से नहीं निकल सकती. अगर निकलती भी है, तो सूरज ढलने से पहले उसे वापस आना पड़ेगा.
• इद्दत के बाद समझौता हो जाए तो रजामंदी से नए महर के साथ दोनों नए निकाह के जरिए रिश्ते को बहाल कर सकते हैं.
• पति पवित्रता की हालत में एक तलाक़ दे. दूसरे महीने दूसरी तलाक दे और तीसरे महीने तीसरा तलाक दे. तीसरे तलाक से पहले समझौता होता है तो पति पिछला रिश्ता बहाल कर ले.
• पत्नी अगर पति के साथ रहना नहीं चाहती है, तो वो खुला के जरिए रिश्ते को ख़त्म कर सकती है.
• जो शख्स एक साथ तीन तलाक दे, मुस्लिम समाज को उसका सोशल बायकॉट करना चाहिए, ताकि इस तरह के मसले कम हों.
कुरान में नहीं है ट्रिपल तलाक का जिक्र
• उर्दू अखबार ‘रोजनामा’ के पूर्व एडीटर असद रजा के मुताबिक, “कुरान में ट्रिपल तलाक का जिक्र कहीं नहीं है. ये सीधे तौर पर मुस्लिम महिलाओं के सम्मान पर किया जाने वाला हमला है.” वहीं, कई इस्लामिक स्कॉलर्स भी कहते हैं कि कुरान/हदीस में कहीं भी तीन तलाक का जिक्र नहीं है.
शियाओं में नहीं होता है ट्रिपल तलाक
• ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के स्पोक्सपर्सन मौलाना यासूब अब्बास का कहना है कि शियाओं में इस प्रथा की कोई जगह है ही नहीं. बोहरा स्कॉलर इरफान इंजीनियर भी इन तीनों मुद्दों को गैर इस्लामी करार देते हैं.


