भारत के युवाओं में एक स्थिर सरकारी नौकरी की चाहत हमेशा से रही है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रोजगार मेला’ के तहत हजारों नियुक्ति पत्रों की घोषणा करके इस सपने को और बल दिया। लेकिन अगर आप सिर्फ इन नियुक्ति पत्रों की संख्या पर ध्यान दे रहे हैं, तो आप एक बहुत बड़ी तस्वीर देखने से चूक रहे हैं। यह घोषणा सिर्फ नौकरियों के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत में युवाओं के लिए अवसरों के भविष्य की एक झलक है।
1. सिर्फ एक इवेंट नहीं, एक ‘संस्था’ बन चुका है रोजगार मेला
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि रोजगार मेला कोई एक बार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक “संस्था” बन गया है जो “मिशन मोड” में काम कर रहा है। हाल ही में हुए 18वें आयोजन में, देशभर में 40 से अधिक स्थानों पर 61,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। यहाँ समझने वाली बात यह है कि यह व्यवस्थित और निरंतर दृष्टिकोण सरकारी भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। पहले जहाँ सरकारी नौकरियों की घोषणाएँ कभी-कभी और अप्रत्याशित होती थीं, वहीं अब इस ‘संस्थागत’ व्यवस्था ने युवाओं को एक तरह की निश्चितता और उम्मीद दी है, जिससे वे अपनी तैयारी को बेहतर ढंग से प्लान कर सकते हैं।
2. यह सिर्फ नौकरी का पत्र नहीं, ‘राष्ट्र निर्माण का निमंत्रण’ है
प्रधानमंत्री मोदी ने इन नियुक्ति पत्रों को केवल नौकरी के प्रस्ताव से कहीं बढ़कर बताया है। युवाओं के लिए इसके सीधे मायने यह हैं कि सरकार उनकी भूमिका को सिर्फ एक कर्मचारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्र निर्माता के रूप में देख रही है। यह सोच उस मानसिकता में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बदलाव लाती है जहाँ ‘सरकारी नौकरी’ का लक्ष्य सिर्फ एक स्थिर वेतन पाना होता है। अब इसे उद्देश्य और योगदान से जोड़ा जा रहा है।
यह एक तरह से नेशन बिल्डिंग का इनविटATION लेटर है ये विकसित भारत के निर्माण को गति देने का संकल्प पत्र है
3. स्टार्टअप, डिजिटल और क्रिएटर इकॉनमी में छिपे हैं लाखों अवसर
सरकार की दृष्टि पारंपरिक सरकारी नौकरियों से कहीं आगे तक जाती है। स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल इंडिया और तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंकड़े इस बदलाव की कहानी खुद कहते हैं: आज देश में लगभग 2 लाख पंजीकृत स्टार्टअप हैं, जिनमें 21 लाख से अधिक युवा काम कर रहे हैं। विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट है कि ये नए क्षेत्र आज की युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं। Gen Z, जो डिजिटल नेटिव हैं, वे पारंपरिक, पदानुक्रमित संरचनाओं के बजाय अक्सर गतिशील और इनोवेटिव माहौल की तलाश में रहते हैं, और ये सेक्टर उन्हें वही मंच प्रदान कर रहे हैं।
4. दुनिया का भरोसा और विदेशी निवेश सीधा युवाओं से जुड़ा है
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का सीधा फायदा देश के युवाओं को मिल रहा है। सरकार कई देशों के साथ व्यापार और आवाजाही समझौते (Trade and Mobility Agreements) कर रही है, जिससे युवाओं के लिए विदेशों में नए अवसर खुल रहे हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि 2014 से पहले के दशक की तुलना में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में 2.5 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। युवाओं के लिए इसका सीधा सा मतलब है कि देश में जितना अधिक विदेशी निवेश आएगा, उद्योग और कंपनियों का उतना ही विस्तार होगा, जिससे उनके लिए रोजगार के अनगिनत नए अवसर पैदा होंगे।
5. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है रोजगार का बड़ा इंजन
रोजगार सृजन की एक ठोस और जमीनी रणनीति आधुनिक बुनियादी ढांचे में किया जा रहा अभूतपूर्व निवेश है। देश भर में चल रही बड़ी-बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कारण निर्माण से जुड़े हर क्षेत्र में रोजगार में भारी वृद्धि हुई है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि विकास समावेशी हो। यह टेक और डिजिटल क्षेत्रों के बाहर एक समानांतर, मजबूत रोजगार बाजार बनाता है, जो उन युवाओं को भी अवसर प्रदान करता है जिनके पास अलग तरह के कौशल हैं।


