नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में बिहार की एचआईवी ग्रस्त रेप पीड़िता को गर्भवती को अबॉर्शन की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। साथ ही बिहार सरकार को आदेश दिया है कि पीड़िता को 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाए।
अदालत ने यह फैसला एम्स के डॉक्टरों द्वारा सौंपी गई उस रिपोर्ट के बाद दिया है जिसमें कहा गया है कि गर्भपात करने से पीड़िता और उसके होने वाले बच्चे की जान को खतरा है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने एम्स के डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि वो पीड़िता की जांच करे और रिपोर्ट दे की 26 महीने की इस गर्भवती का अबॉर्शन करना सही होगा या नहीं। अदालत ने यह निर्देश महिला की तरफ से एक्टिविस्ट लॉयर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए थे।
महिला के साथ पटना में दुष्कर्म हुआ था जिसके बाद वो गर्भवती हो गई थी। महिला ने गर्भवती होने के 17वें हफ्ते में राज्य सरकार से गर्भपात की अनुमति मांगी थी लेकिन अनुमति नहीं मिली जिसके बाद वो पटना हाईकोर्ट पहुंची थी। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका पर ही सुनवाई से इन्कार कर दिया था तब तक उसका गर्भ 20 हफ्ते का हो गया था।

